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शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018
शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017
गौरा देवी पर आधारित गीत नाटिका Gaura Devi was an India Chipko activist in the Himalayas
गौरा- हाथ जोड़ी या गौरा बिनती कनि च,
न काटा यूँ डाळयूँ तै हाथ जोणी च।
यू डाळी छन ये पाडों कू भोळ और आज,
यूँ का प्रति सुरक्षित च या धरती आज ।।
अधिकारी - बाठू रोक न गौरा तू डाळी कटण दी,
सरकरी हुक्म च वे तै हम तै मनण दी ।।
गौरा - प्यार से बौनू छौ प्यार से तुम सुण ल्यावा,
जन तुम ऐ छा वुनि वापस तुम बौडी जवा ।।
डाळयूँ समणी जाण से पैलि हमसे लण पोड़लू,
डाळयूँ कटण से पैली यी गौरा तै कटण पोड़लू ।।
यूँ तै सैंती पाळी हमन अपड़ा नोन्यळ जन,
प्राण त्यागी त बी हमुन डाळयूँ कि रक्षा कन।।
अधिकारी- तिल सामान छै तू गौरा त्येरि क्या औकात च,
घार चूलू चौका कैर तू त्येरि बस कि नि बात च ।।
गौरा - काट द्योलू मि मार द्योलू थमेळी म्येरा हाथ च,
तिलु रौतेली बण जौलू मि या पाड़े नारी जात च।।
चला दीदी भूल्यूँ यूँ डाळयूँ पर तुम चिपकी जवा,
यी धरती का दुश्मनू तै तुम पाड़ बटि दूर भगावा।।
यूँ का प्रताप से बौग्णीन यू गंगा जमना,
यूँ का प्रताप देखि धरती मा बसंत हमना।।
अधिकारी - मान जा गौरा तू बात अबी बी बक्त च,
प्रशासनो कू अयू ऑडर शक्त च ।।
गौरा - जा बोल दिया वे मंत्री मा ,
पाड़ मा कै तिलु रौतेल्यूं जन्म लियेल ।।
चिपकी गेन डाळयूँ पर,
चिपको आन्दोलन स्यून चलेयेल ।।
चिपको आन्दोलन स्यून चलेयेल ।।
अगेलू हमनू जग्येल,
आग अब सरा पाड़ देश मा लगेली ।।
आग अब सरा पाड़ देश मा लगेली ।।
चिपको आन्दोलन कि क्रांति ऐगी,
अब यू पर्यवरण बिरोधी सरकार जगेली ।।
अब यू पर्यवरण बिरोधी सरकार जगेली ।।
प्रदीप रावत ❝खुदेड़❞
14/12/2017
14/12/2017
बुधवार, 15 नवंबर 2017
उमार कटेगी मेरि गौ का ओडा धारूँ मा,
उमार कटेगी मेरि गौ का ओडा धारूँ मा,
म्येसणी तू अपड़ी दगड़ा शैर सरकाणे छ्वीं न कैर।
मि खूब छौ ईख, एखि होड़ पोडयूं ,
म्येसणी तू हैका होड़ फ़रक़ाणे छ्वीं न कैर।
अटगवू छौ मि, जब बटि तू शैर क्या गये,
जब बटि तू भैर क्या गये,
तब बटि तू द्वी लपक पैदल नई चल सकणी छै।
म्येसणी भी तू लम्बी ठंडी कार मा बैठाणे छवि न कैर।
इखी ई थाती मोरी अमर व्हे जौलू मी,
म्येसणी तू यी धरती बटि उठाणे छवी न कैर।
जब बटि तिन स्यू लदोडू (पिज्जा) सी चबाण क्या सीखी,
अटगवू छौ मि,
त्वे घरया कल्यो देखी उक्ये आणी च,
मेते भी तू चम्चोन खालणे छ्वी न कैर।
मि खूब जाली जंदों डांडा बोण मा,
मेसाणी बी सैणा दोंपाल चलाणे छ्वीं न कैर।
हाँ अगर त्वे मेरि फिकर च, ए
साल छै मैना मा पितृ ते याद कैदे।
म्येरू आश्रीवाद त्वे दगड़ी रालू ,
गोवा शिमला घुमणा बाद,
चार दिनों अपड़ा मुल्क भी एैजे।
गुरुवार, 2 नवंबर 2017
अलग व्हेगेन Garhwali Poem By Pardeep Singh Rawat Khuded
जड़ड़ू गोळू एक छौ फौंगा अलग व्हेगेन।
सुण मा आणी पल्या मौ का बी अलग व्हेगेन।।
ज्यू लाट निसड़ू एक च डांगा अलग व्हेगेन।
बाब दादा एक छन पर फंगा अलग व्हेगेन।।
द्यौ देब्ता एक छन द्यीव धूपोणू अलग व्हेगेन।
अब त दुख बिपदा मा बी उचेणू अलग व्हेगेन।।
खोळ एक च पर पैणू पातू अलग व्हेगेन।
डिंडाळी एक च पर अब बाटू अलग व्हेगेन।।
लुहार एक च पर अब पयार अलग व्हेगेन।
औजी एक च पर अब डडवार अलग व्हेगेन।।
धारू पंदेरू एक च पर अब बंठा अलग व्हेगेन।
छौ एक जू सोनो टूकड़ा वू कंठा अलग व्हेगेन।।
खातु खतोनी एक च पर हिसाब अलग व्हेगेन।
डाक डाकनू एक च पर किताब अलग व्हेगेन।।
हाँ अगर अलग नि व्हे त,
बाबा जी कि छाया माँ जी कू दुलार।
दै दादों की ओट दिशा ध्याण्यू प्यार।।
प्रदीप सिंह रावत ”खुदेड़“
मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017
पहाड़ केवल साइबर मिडिया में आबाद है,
पहाड़ केवल साइबर मिडिया में आबाद है,
सच तो ये है पहाड़ अब पहाड़ में ही बर्बाद है ।
कुछ नुकसान किया पहाड़ में सुआर और बन्दरों ने,
बाकि जो बच गया उसे उजड़ा डाम के थोकदारों ने ।
जब से मनरेगा ने पहाड़ में पसारे है पाँव,
तब से बंजर के बंजर हुए पहाड़ के गाँव।
गाय भैंस है नहीं अब, खेतों में कहाँ खाद है,
सच तो ये है पहाड़ अब पहाड़ में ही बर्बाद है ।
कुछ मिट्टी रेत हडपी पहाड़ की खनन माफियों ने,
बाकि जो बची थी उसे बहाया बरसाती आपदाओं ने।
कुछ हरे भरे जंगल स्वा किये गर्मियों की आग ने,
बाकि जो बचे थे उसे कटवाया भ्रष्ट बिभाग ने।
अपनी सरकार के पास नहीं कोई जवाब है
सच तो ये है...............................
कुछ खून की कमी ने मारा पहाड़ की नारी को ,
कुछ को मारा शराबी मर्द ने
कुछ को इकुलांस के बोझ ने मारा ,
कुछ को मारा स्वीली दर्द ने।
कुछ बच्चों का भबिष्य अन्धकार किया ,
हलधर मास्टर ने ।
बाकि जो बचा था उसे बर्बाद किया ,
अस्पताल में बिन डाक्टर ने ।
मुख्यमन्त्री जी हवा में मंत्री बिदेश की सैर में,
खूब लूट रहे है उत्तराखंड को दोस्तों दिन दोपहर में।
कैसे करे बिकास न नीति है न नीयत है साफ,
जैसा प्रशासन है दोस्तों वैसे हम और आप।
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
सिंहावलोकन कविता - मृगनयेनी
सिंहावलोकन कविता, काब्य की एक बिधा है। इस प्रकार की कविता में कविता जिस पहले शब्द से शूरु होती है, उसी शब्द से खत्म होती है, तथा कविता की पहली पंक्ति जिस शब्द से खत्म होती है अगली पंक्ति की शुरुआत उसी शब्द से होती है, और ये क्रम आगे की पंक्तियों में भी जारी रहता है।
मेरी इस प्रकार की एक कविता आप लोगों के सामने प्रस्तुत है।
मृगनयनी चित चोर छै तू चंचल स्वाणी,
स्वाणी सूरत मा त्येरि या मायाळी बाणी।
बाणी पर स्वरुं कू साज सरस्वती च लै,
लै पहनी कि जब तिन सोलह श्रृगांर कै।
कैै-कै दिन तक हर्ची रै म्येरि सेणी खाणी,
खाणी कमाणी मा बी गंट्याणू त्येरि गाणी।
गाणी इनि मिन देखी त्वेमा अन्वार फ्योली,
फ्योली सी उदमति तू घसेरुयूँ की छै न्योली।
न्योली सी झीस लग्येगे म्येरा क्वंसा प्राणमा,
प्राणमा बसग्ये जन भौरुं बसी फुल रस खाण।
खाण छै तू रूप रंगे की भली-भली मयेळी,
मयेळी माया जरा पैन्छी देदी हे!बांद दयेळी।
दयेळी छै तू रूपवती गुणवती हे! नृपनयेनी,
नृपनयेनी बणी रै तू सदा म्येरी हे! मृगनयेनी।।
प्रदीप रावत "खुदेड़"
31/08/2017
बुधवार, 30 अगस्त 2017
अ बटि अः तक गढ़वोळी सवरूँ कू वाक्य प्रयोग
अ-: अब स्यूं नेतो कू ढालू पहचैण मा आणू च
आ-: आम छौ पैली जीतणा बाद ख़ास व्हे जाणू च ।।
इ-: इबरीदां चुनौ मा तैन फिर गौमा जाण।
ई-: ईंट ढुंग धारि योजनो कु शुभारम्भ कै जाण।।
उ-: उबारिदां जू वादा कैरी छा तैन फिर वी बोलण
ऊ-: ऊँच नीच कु खेल तैन फिर इबरी बी खेलण।।
ए-: एक मैना तक नोन्यलु तै खूब दारु तैन पिलाण।
ऐ -: ऐन्च मंच पर चौड़ी विकास की नौटंकी चलाण।।
ओ-:ओर पोर तैका चेला चमचा की हमेसा मौज राण।
औ-: और जितणा बाद तैंन कबि मुख्जात्रा नि दिखाण।।
अं- अंध भक्ति मा नि डुबा तै की मान जावा म्येरि बात।
अः- अःण सुण कन तैन तुम्हारी मांग जीतणा का बाद।।
प्रदीप रावत "खुदेड"
29/08/2017
सोमवार, 28 अगस्त 2017
रविवार, 27 अगस्त 2017
बाल कविता -घिंडुड़ी "मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू"
मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू
मे देखी की गुडिया राणी खुश व्हे जांदी
गोळया लगे लगे की वा म्येरा पैथर आंदी
मि वींका बाँटौ दूध पेकी फूर उड़ी जांदू
कबी कबी वेंकी दगड़ी मि छवी बी लगांदू
मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू
प्रदीप रावत "खुदेड़"
28 /08 /2017
शनिवार, 26 अगस्त 2017
घुघती राणी Spotted dove -बाल कविता नंबर एक
या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुट्यार मा एैकी चारू खाणी च।
घुर-घुर कैकी तै वा दगड्यों तै बुलाणी च,
अपड़ा चोंचन वा सगोड़ा मा चारू खोज्याणी च
चोंच मा दबै की वा बच्चो कू चारू लिजाणी च।
आज घुघती हुयी कुछ उदास च,
किलै की गुडिया गयी अपड़ी नान्या पास च।
या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुटयार मा एैकी चारू खाणी च
या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुटयार मा एैकी चारू खाणी च।
प्रदीप रावत "खुदेड़ "
शुक्रवार, 25 अगस्त 2017
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ , By Pradeep Singh Rawat Khuded
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ ।
मै उसकी बिषम प्रस्थिति से लड़ न सका,
मै उसकी कठोर मेहनतकश ज़िन्दगी में ढ़ल न सका।
मुझे जो आसान रास्ता दिखा मैंने उसे ही स्वीकार किया,
मैंने पहाड़ से ज्यादा अपने हितों से ही प्यार किया।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ ।
मैंने एक बार भी नहीं सोचा,
अगर पहाड़ के हित के लिए लड़ता
तो मेरी आने वाली पीढियाँ नहीं होती बेमुख,
उनकी राह के काँटों को मै चुन लेता
उनकी राह के काँटों को मै चुन लेता
तो कभी नहीं मिलता उन्हें कोई दुःख।
पर मैंने इस पहाड़ के हाल को कुछ
पर मैंने इस पहाड़ के हाल को कुछ
सत्ता लोभी नेताओं के हवाले छोड़ दिया,
चल उठा मै थैला लेकर शहर की ओर
चल उठा मै थैला लेकर शहर की ओर
अपनी जिम्मेदारी से मुख मोड़ दिया।
मैंने कभी वहाँ के संसाधनों का उपयोग करने का प्रयास नहीं किया,
मैंने कभी वहाँ के भटके युवाओं को सही मार्ग दर्शन नहीं दिया।
मैंने अपनी ही पीड़ा को पहाड़ में सर्वपरि माना ,
कभी वहाँ की माँ बेटियों के दुःख को नहीं पहचाना।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ।
मैंने कभी वहाँ के संसाधनों का उपयोग करने का प्रयास नहीं किया,
मैंने कभी वहाँ के भटके युवाओं को सही मार्ग दर्शन नहीं दिया।
मैंने अपनी ही पीड़ा को पहाड़ में सर्वपरि माना ,
कभी वहाँ की माँ बेटियों के दुःख को नहीं पहचाना।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ।
क्या हुआ अगर मेरे सपने रह गए थे अधूरे,
मेरे आने वाले दोस्तों के सपने तो होते पूरे।
मुझे वहाँ के बिकास के लिए अपनी जवानी खपानी चाहिए थी,
लोगो में उनके अधिकारों के प्रति एक क्रांति जगानी चाहिए थी।
मै उस पहाड़ का एक भागा हुआ सिपाई हूँ,
मै उस पहाड़ का एक हारा हुआ सिपाई हूँ।
गुरुवार, 10 अगस्त 2017
क्या बता सकते है ये कविता किसी प्रसिद्ध गढ़वाली गीत का अनुवाद है
रूप रंग तुम्हारे इस यौवन में,
उम्र के इस सावन में
मेरे भी इस कोमल से मन में
प्यास लगा दी है आस जगा दी है
यू मत मुस्कराओ दांतों पर दाग लग जायेगा
अपने होंटो को बंद कर लो
फूल समझकर भँवरा घुस जायेगा
तुम्हारे यौवन को देखकर बुरांस बेचारा
हैरान है परेसान है
किस जहाँ से लेकर आये होे ये कोयल जैसा गला
ऐसी बतुनी आँखे कहाँ से पायी है तुमने भला
तुमारी झपकती पलकों के इशारे
मन में दबी बातों की परते खोल रही है
ये आँखे कुछ तो बोल रही है।
ख़ुदा की भी नजर है तुम्हारे चेहरे पर
ये चेहरा हमारे दिलों में भी बसा है
तुम्हे अपना बनाने के लिए चकोर भी लगा है
तुझे देखकर हयो राम
ये ढलते दिन का घाम
ढल सा गया है। ओझल सा हो गया है
हर किसे से कोई यूँ प्यार नहीं करता
बिना आग के कहीं धुआ नहीं उठता
तुमारे इस दिल में किसकी तस्वीर है
मै जान चूका हूँ मै पहचान चूका हूँ
मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017
गरीब जी तूमूकू सत सत प्रणाम ganesh Gareev Ji
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश गरीब ज़िंदाबाद
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश क्रांति ज़िंदाबाद,
Shagun uniyal - Video Dailymotion:
Shagun uniyal - Video Dailymotion:
हक़ ये पहाड़ो को हम लेकि रोला
जवानी ये पहाड़ ते हम देखी रोला
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश गरीब ज़िंदाबाद
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश क्रांति ज़िंदाबाद,
गरीब जी तूमूकू सत सत प्रणाम
चकबंदी की अलख जगाई ग्राम-ग्राम
सच्चा धरती पुत्र छा तुम ये गढ़देश का
चकबंदी की जोत जू तुम्हारी जगाई च
यी जोत का प्रकाश से अंधेरू हम मिटोला
ज़िन्दगी खपे दे तुमन चकबंदी की लड़ै मा
अपड़ा सुप्न्या कुचल दें तुमन ये पहाड़े की भैले मा
हक़ ये पहाड़ो को हम लेकि रोला
जवानी ये पहाड़ ते हम देखी रोला
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश गरीब ज़िंदाबाद
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश क्रांति ज़िंदाबाद
Shagun uniyal - Video Dailymotion:
हक़ ये पहाड़ो को हम लेकि रोला
जवानी ये पहाड़ ते हम देखी रोला
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश गरीब ज़िंदाबाद
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश क्रांति ज़िंदाबाद,
गरीब जी तूमूकू सत सत प्रणाम
चकबंदी की अलख जगाई ग्राम-ग्राम
सच्चा धरती पुत्र छा तुम ये गढ़देश का
सच्चा हितकारी छा तुम ये प्रदेश का
तुम्हारी लगन देखिकी नौजवानू ते प्रेरणा मिलदी
तुम्हारी लगन देखिकी नौजवानू ते प्रेरणा मिलदी
तुम्हारी मातृभक्ति देखि की हममा मातृभक्ति जगदी
चकबंदी आंदोलन ते तुमन जनआंदोलन बणाई
चकबंदी ही लाली ये पहाड़ मा खुशहाली लोगू ते बताई
संघर्ष तुम करा साथ हम द्योला
ऐथर-ऐथर तुम चला पैथर-पैथर हम अौला
चकबंदी आंदोलन ते तुमन जनआंदोलन बणाई
चकबंदी ही लाली ये पहाड़ मा खुशहाली लोगू ते बताई
संघर्ष तुम करा साथ हम द्योला
ऐथर-ऐथर तुम चला पैथर-पैथर हम अौला
चकबंदी की जोत जू तुम्हारी जगाई च
यी जोत का प्रकाश से अंधेरू हम मिटोला
ज़िन्दगी खपे दे तुमन चकबंदी की लड़ै मा
अपड़ा सुप्न्या कुचल दें तुमन ये पहाड़े की भैले मा
हक़ ये पहाड़ो को हम लेकि रोला
जवानी ये पहाड़ ते हम देखी रोला
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश गरीब ज़िंदाबाद
ज़िंदाबाद, ज़िंदाबाद गणेश क्रांति ज़िंदाबाद
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017
बिसरदि भाषा
बिसरदि भाषा की मि पैलुड़ी बणाणु छौ।
हर्चदा गढौळी सब्दूं तै कबितौ मा सजाणु छौ ।।
भोळ नि पुछ अणवोई पीढ़ी,
हमारि बी रै होलि क्वी भाषा बोली ।
तब ढुढण हमन या भाषा कि कख गै होलि।
तुम परदेसी भै बन्ध भी अपड़ा नौनो तै यी भाषा सिखावा ।
हमारि पूवर्जो की यी पुस्तैनी विरासत तै बिसरण से बचावा ।।
इस लिंक पर देखिये - गढ़वाली सुपरहिट फिल्म भाग-जोग
अपड़ी तरक्की दगड़ी तुम यी भाषै तरक्की बी कैर दैवा।
केवल गीत गाणो मा ना, यी तै बोल चाल मा बी अपनावा।
थड़या चैंफला लगा तुम अखणा-पखणा बी तुम बोला।
माटा मा मिन से पैली तुम अपड़ा आंखा खोला।।
(भाग-जोग ) पार्ट दो को इस लिंक ओपन करके देखिये,
राजेस्थान्यून राजेस्थानी पंजब्यून पंजैबी बोली ।
हम पहाड़यून अपड़ी भाषा बोलण किलै छोड़ी ।
यी भाषा बोलण मा किलै कना छा तुम सरम ।
अरे या त हमारि संस्कृति च यी च हमारू धर्म।।
इस लिंक पर देखिये । एक ऐसा गीत जिस सुनकर आपको अपने खोये हुए लोग की याद आ जाएगी।
रचि दया तुम बी एक साहित्य अपड़ी यी भाषा मा ।
भिगी जावा तुम बी यू गढ़ौळी सब्दू का चैमासा मा ।
ज्वा रीत चनी च यी रीत तै तुम बणेकी राखा ।
अपड़ी भाषा तै तुम कैकी समणी कम नि आंका।।
सोमवार, 13 फ़रवरी 2017
कलम इतनी कमजोर निकली उनकी,
कलम इतनी कमजोर निकली उनकी,
नेता के गुणगान में लिखने लगी है।
कल तक जो कलम जनतंत्र के लिए बोलती थी,
चुनाव के मौसम में नेता के आँगन में दिखने लगी।
इस कलम में तो स्याई उनकी निकली,
जिनको पांच साल तक कोस रहे थे।
कागज जनतंत्र का था,
भाषा अलंकारों में बोल रहे थे।
बस इस कलम के लिखे शब्द
दो मास में झुमले कहें जायेंगे
कविता गिरबी रख दी जब,
अच्छे छंद कहाँ रंचे जायेंगे।
फिर क्यों इतनी महंगी कलम से,
हल्का रंग भरने की क्या जरुरत थी।
कवि तो आईना था समाज का,
बुधवार, 25 जनवरी 2017
ऐंच आगासू मा उड़द देखि मिन उत्तराखंड कु भाबिष्य भैजी l
ऐंच आगासू मा उड़द देखि मिन उत्तराखंड कु भाबिष्य भैजी
निस सड़क्यू मा उंद बोगद देखि मिन उत्तराखंड कू भैजी
आपदा मा मोरद देखि मिन
डेनिस मा जीतम फुक्द देखि
इस लिंक पर देखिये गढ़वाली सुपर हिट फिल्म भाग-जोग
सी गंगो कू बालू बेच्णा छा।
जमिनू कू सौदा करणा छा
देरादून मा भांडा मज्यंद देखि उत्तराखंड कू भाबिष्य भैजी
सि बिदेश घुमणा छा
पार्टी बदलणा छा
दल बदलूं कु झंडा उठान्द देखि मिन उत्तराखंड कू भाबिष्य भैजी
इस लिंक पर देखिये गढ़वाली सुपर हिट फिल्म भाग-जोग
सि झूठा घोषणा कना छा
पिछला साले बात बोना छा
स्यूं कू ते कुर्सी बिछान्द देखि मिन उत्तराखंड कू भाबिष्य भैजी
बुधवार, 4 जनवरी 2017
सैद चुनाव ऐगी । Garhwali Poem By Pardeep rawat Khuded
घटा छंटेगी,
फ़िज़ा बदलेगी ।
सैद चुनाव ऐगी ।
कुकर बाघ बिरोवू,
बांदर नेवला गुरोवू ।
किले आज एक व्हे होला,
संसद मा भ्याळी तक,
लगांदा छ जू आरोप ।
आज स्यू नेक किलै व्हे होला,
सैद चुनाव ऐगी ।
गरीबा घार मा आज दिन मा,
किलै द्वी जग्यूचा ।
सेठा दुर्पला मा आज,
किलै झंडा टंग्यूचा ।
सैद चुनाव ऐगी ।
भ्याळी तक गौमा,
बेरोजगारू की भरमार छै।
जनता भी पांच सालो ,
हिसाब ले की तैयार छै।
पर आज सरू गौ खाली,
सैद चुनाव ऐगी ।
गौ- गौमा किलै फूट व्हे होलि,
भै-भै मा किलै टूट व्हे होलि।
सैद चुनाव ऐगी ।
आज स्यू लोवू स्याळ ,
मुंगरा किलै नि भूखाणू होलू।
आज थानेदार लोखू तै,
आँखा किलै नि दिखाणू होलू।
सैद चुनाव ऐगी ।
किलै आज कल हेलिकॉप्टर
उड़णान हवा मा।
शेरूदा किलै टैट बण्यु होलू
सुबेर बटी पव्वा मा।
सैद चुनाव ऐगी ।
किलै आजकल क्वी उतारनू पहनू च,
सराफत कू नकाब।
किलै आजकल वैष्णो ढाबा मा,
बिकण बैठी सराब कबाब।
सैद चुनाव ऐगी ।
किलै आज दिन रात का पहर,
शैद घुमणा छन। (सफ़ेद पोशाक वाले)
किलै आज कुछ खास लोग,
गुजरों कि गुजरायण सूंघणा छन।
सैद चुनाव ऐगी ।
प्रदीप सिंह रावत ''खुदेड़''
शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016
छोड़ा तुम क्या लगाण, #Garhwali Poem By # Pardeep Singh Rawat "Khuded"
छोड़ा तुम क्या लगाण,
अपडा घौरा हाल तुमा क्या बताण।
अपडू ठाटा अफि क्या लगाण,
अपड़ा घौरे छवि भ्यार क्यांकू सराण।
इस लिंक पर देखिये। जगा रे उत्तराखंडवास्यूं
जगा रे जाग्रति गीत क्या हलात हो गयी है
रमणीय प्रदेश की जरुर सुने।
सांगी पर डूट्याल पूर्व्य लग्य छन,जगा रे जाग्रति गीत क्या हलात हो गयी है
रमणीय प्रदेश की जरुर सुने।
गौं का नौजवान प्रदेश बस्या छन।
इख त बस बुढया बच्या छन,
तेरेह खाणू नजिमाबाद बामुण अया छन।
इखा बामणु त दिल्ली पूजा पर लग्या छन। ।
गढ़वाली भाषा की सोशियल मिडिया पर वारयल
कविता जो आपने भी जरुर शेयर की होगी।
पत्रकार लोगबाग देरादून बसग्येन,
गवें खबर पेपर बटि हर्चीग्येन।
लैन मा खड़ा हुयां स्यू सरकारा द्वारमा,
लम्बी-लम्बी गाडी लियेन स्यूं इश्तिहार मा।
इस लिंक पर देखिये । एक ऐसा गीत जिस सुनकर
आपको अपने खोये हुए लोग की याद आ जाएगी।
दिल्ली चंडीगढ़ बम्बे वोळा फोंद्या बणया छन,
अफु त भाषा बोना नि छन।
हर कालोनी मा छ्कण्या संस्था बणि छन,
सालेक मा नाच गणा कनि छन।
एकता नौ पर बौगा मनि छन।।
शुक्रवार, 25 नवंबर 2016
हे न्या जमना हे नयी जनरेसन, Garhwali Poem By PardeeP Rawat
हे न्या जमना हे नयी जनरेसन,
हाथू मा इस्मार्ट फून फोर जि कू कनेक्सन।।
फेसबुक ट्विटर व्हाट्सअप पर बात होणी च,
सेणी खाणी सब हर्चगी चैटिंग सरि रात होणी च।।
गोर चरणदा होळ लगंदा घास कटण मा बी ऑनलैन छन,
जिंदगी हकीकत बटि सबी ऑफ़ लैन छन।।
जणि कख लगजा तौन्कू रौंग कनेक्सन,
लैक कमेन्ट कने तौंकी रिक्वेस्ट भेजी च,
ब्वे बुबों कि अर्जी न,नोनी अर्जी अप्सेप्ट करी च।।
नोनी की हाई मा ही सैकड़ो लैक कमेन्ट आणा छन,
हमारि कवितों की पोस्ट देखि मुख फरकाणा छन।।
जरा ध्यान दिया बुबों चलि नि ज्या रोंग डेरेक्सन,
खांदी सेन्दि वक्त की सल्फी झट होणी च अपलोड,
चिट्टी पत्रि इ मेल तार कू जमनू व्हेगी अब ओल्ड।।
नेता अफसरो घूसो विडिओ झट वायरल हुयूचा ,
नेते कुर्सी चलगी अफसरो नोकरी बटी हाथ दुयूचा।।
कबि ख़ुशी कबि देन्दु य़ू भारी टेंसन,
मिंटू मा वायरल होणा छन गौ गौळो का समाचार,
बुरा कामू नि बणा तुम सोसियल मिडिया ते हथियार।।
एक हैके मौ मदद मा लवा तुम ये माध्यम ते काम मा,
सुदी मुदि दाग नि लगावा तुम कैका बी नाम मा।।
प्रदीप रावत "खुदेड़"
बुधवार, 23 नवंबर 2016
माँजी म्येरि माँजी Garhwali Poem By Pardeep Rawat Khuded
ममता तेरि ममता,
गंगा सी छाई ममता त्येरि ममता।
दूध सी दुधाई ममता त्येरि ममता
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
इस लिंक पर देखिये। जगा रे उत्तराखंडवास्यूं जगा रे जाग्रति गीत क्या हलात हो गयी है रमणीय प्रदेश की जरुर सुने।
गीलामा अफू से होलि सूखामा में सिवाई
अफू भूखी रै होलि अपडू बाँठू में खिलाई
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
हिवू सी ह्विई ममता त्येरि ममता
जून सी जून्याई ममता त्येरि ममता
गढ़वाली भाषा की सोशियल मिडिया पर वारयल कविता जो आपने भी जरुर शेयर की होगी।
हाथ पकड़ी कि तिन मेतै बाठू बताई
अन्धेरा मन म्येरा तिन ज्ञान कू ऊज्यवु काई
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
सूर्या सी चिटी ममता त्येरि ममता
सैद सी मिठी ममता त्येरि ममता
इस लिंक पर देखिये । एक ऐसा गीत जिस सुनकर आपको अपने खोये हुए लोग की याद आ जाएगी।
म्येरा होणमा जौं आँख्यू मा खुशी छै वु आंसून चुणीन
टूट गेन सब सुप्नया जू तिन मेरा होणमा बुणीन
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
रंग सी रंगीली ममता त्येरि ममता
फूलू सी चमकीलि ममता त्येरि ममता
इस लिंक पर देखिये - गढ़वाली सुपरहिट फिल्म भाग-जोग
आज मि जख भी तेरू ही आर्सीबाद चा
खैरी का आँसू कू दियू मेरू यू कनू प्रसादचा
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
हल्दी सी पूज्या ममता त्येरि ममता
निच क्वी दूजा ममता त्येरि ममता
गंगा सी छाई ममता त्येरि ममता।
दूध सी दुधाई ममता त्येरि ममता
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
गीलामा अफू से होलि सूखामा में सिवाई
अफू भूखी रै होलि अपडू बाँठू में खिलाई
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
हिवू सी ह्विई ममता त्येरि ममता
जून सी जून्याई ममता त्येरि ममता
गढ़वाली भाषा की सोशियल मिडिया पर वारयल कविता जो आपने भी जरुर शेयर की होगी।
हाथ पकड़ी कि तिन मेतै बाठू बताई
अन्धेरा मन म्येरा तिन ज्ञान कू ऊज्यवु काई
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
सूर्या सी चिटी ममता त्येरि ममता
सैद सी मिठी ममता त्येरि ममता
इस लिंक पर देखिये । एक ऐसा गीत जिस सुनकर आपको अपने खोये हुए लोग की याद आ जाएगी।
म्येरा होणमा जौं आँख्यू मा खुशी छै वु आंसून चुणीन
टूट गेन सब सुप्नया जू तिन मेरा होणमा बुणीन
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
रंग सी रंगीली ममता त्येरि ममता
फूलू सी चमकीलि ममता त्येरि ममता
इस लिंक पर देखिये - गढ़वाली सुपरहिट फिल्म भाग-जोग
आज मि जख भी तेरू ही आर्सीबाद चा
खैरी का आँसू कू दियू मेरू यू कनू प्रसादचा
माँजी म्येरि माँजी
ममता त्येरि ममता
हल्दी सी पूज्या ममता त्येरि ममता
निच क्वी दूजा ममता त्येरि ममता
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