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शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

एक हफ्ते में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला गढ़वाली हास्य VIDEO

आखरि इस विडिओ में ऐसा क्या है कि यह एक हफ्ते में उत्तराखंड यू ट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला विडिओ बन गया, अभी तक इस विडिओ को दो लाख पैंतीस हजार से भी ज्यादा बार  देखा गया है, एक कमरे में विना किसी स्क्रिप्ट, बिना किसी तैयारी, और बिना मजे कलाकारों, के द्वारा फिल्माया गया है, आप देख सकते है की बहार की आवाजे भी इस विडिओ में आ रही है, हालाँकि इसमें पुरुष कलाकार धारा प्रवाह गढ़वाली बोल रहा है, उसकी भाषा पर पकड़ अच्छी होने के साथ टाइमिंग अच्छी है जो लोगो को पसंद आ रही है, लड़की को गढ़वाली नहीं आने के बाद भी वह गढ़वाली के कठिन शब्दों को समझ रही है, और उसका जवाब अपने अंदाज में दे रही है, यही इस विडिओ की खासियत है, जो लोगों को देखने और शेयर करने पर मजबूर कर रही है |
जहाँ कुछ साल पहले उत्तरखंड में सिनेमा लगभग ख़त्म सा हो गया था, यू ट्यूब आने के बाद धीरे-धीरे सही पर उत्तराखण्डी सिनेमा अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है, और कई लोग इसमें काम करने को तैयार हो रहे है, अभी हाल ही में अनमोल प्रोडक्शन ने "पहाड़ी घचेक" नाम से एक कुमाउनी सीरीज निकली है जो लोगों को बहुत पसंद, गौरतलब है की अनमोल प्रोडक्शन ने अभी हाल ही में गोपी भेना नाम से एक कुमाऊंनी फिल्म भी बनायीं थी जो लोगों को बहुत पसंद आयी जल्द यह फिल्म ऑनलाइन भी देश विदेश में दिखाई जाए वाली है ,
इसी प्रकार ईजा प्रोडक्शन भी गढ़वाली कुमाउनी सीरीज जल्द लाने वाले है जिसकी आजकल दिल्ली के अलग अलग जगह पर शूटिंग चल रही है, ईजा प्रोडक्शन लोकरंग टीवी के माध्यम से फसक नाम से भी एक सीरीज चला रहा है, गढ़वाली और कुमाउँनी कविताओं को भी ईजा प्रोडक्शन लोगों के बीच लाने का काम कर रहा है
वही राखी धनै अपनी गढ़वाली सीरीज के माधयम से प्रसिद्ध हो चुकी है, बीइंग उत्तराखंडी के नाम से यह सीरीज काफी दिनों से यू ट्यूब पर पसंद की जा रही है, इसमें एक और जाना माना नाम और है भगवान् चंद जो छोटे जोक के माध्यम से यु ट्यूब पर छाये रहते है, कुल मिलकर हम कह सकते है की आने वाले वाला वक्त उत्तराखंडी सिनेमा में कुछ नया होने होने जा रहा है,

रिलीज हुआ किशन महिपाल का नया उत्तराखंडी गीत "स्याळी शंकरा "

फिर एक बार अपनी आवाज से धूम मचाने को आ चुका है किशना महिपाल का "स्याली शंकरा" गढ़वाली गीत, गौरतलब है कि किशन महिपाल के फ्युलोडिया गीत को अभी तकंप MP3 और विडिओ वर्जन को 45 लाख से ऊपर लोग देख चुके है , इसके आलावा इस गीत में उत्तराखंड के नए टेलेंट ने अपने हिसाब से अलग-अलग स्टाइल में नृत्य किया है, इन के द्वारा बनाये गए विडिओ को भी लाखो लोगों ने देखा है, इस


तरह से उत्तराखंड के गीत संगीत में यह गाना सबसे ज़्यदा देखा जाने वाला गीत बना हुआ है, क्या किशन महिपाल का नया गीत स्याळी शंकरा इस गीत के रिकॉर्ड को ब्रेक करेगा, ये तो आने वाला वक्त ही बातयेगा, स्याळी शंकरा का म्यूजिक ईशान डोभाल ने तैयार किया है और रिदम उत्तराखंड के जाने माने ढोलक वादक सुभाष पांडे जी का है, स्याळी शंकरा का पूरा गीत इस लिंक को ओपन करके दिखिए

मंगलवार, 14 मार्च 2017

पांडववास ने "घुगुती बसुती" और "फुलारी" गीतों के माद्यम से उस वर्ग को वापस अपने पुराने अतीत में पहुँचा दिया है

पांडवास गढ़वाल के एसे गीतों को लोगों तक पहुंचा रहा है जिन्हें नयी पीढ़ी तक पहुँचाना बहुत जरुरी है। भले आज के गायक बहुत कम समय में अपनी पहचान बनाना चाहते हो। इस लिए वह ज्यदातर गीत DJ वाले गाते है । नरेन्द्र सिंह नेगी जी के इस गीत को नये दौर के गायक संगीतकार और फिल्मांकन टीम ने लोगों के सामने परोसा है। नेगी जी के कई ऐसे गाने है जिन्हें सुनकर श्रोता खो जाते है पर जब उनका फिल्मांकन होता था तो गाने की आत्मा मर सी जाती थी। जो शब्द नेगी जी ने गढ़े थे उनके साथ न्याय नहीं हो पता था । पर इस बार लोगों को निराश नहीं होना पड़ा लोगों के अंतरात्मा तक इस विडियो गीत ने जगह बनाने के साथ साथ उन्हें झकझोर कर एक ऐसी चोट की है जब भी श्रोताओं को इस गीत का ध्यान आता है तो वह अंदर ही अंदर रोने लग जाता है। भले उसके चेहरे पर नकली ख़ुशी हो पर अंदर से वह अपने आप अपनी सरकारों को कोसता जरुर है।
पांडववास ने "घुगुती बसुती" और "फुलारी" गीतों के माद्यम से उस वर्ग को वापस अपने पुराने अतीत में पहुँचा दिया है जो उन्होंने गाँव में जीया था। तथा वह रोजगार के लिए अपने गाँव अपने मुल्क को छोड़ कर शहरों की तरफ चले गए थे इन गीतों को नयी पीढ़ी भी हाथो हाथ ले रही है। भले अभी उत्तराखंड के पहाड़ी गाँव में यू tube की पहुँच न के बराबर हो। जिस कारण कई लोग इन गीतों को नये रंग नये फिल्मांकन यू कहें नये आर्ट के साथ हाल फिलाल न सुन सके। पर एक वह वर्ग जो सोशियल मिडिया से जुडा हुआ है उसे इन गीतों ने चिन्तन करने पर मजबूर कर दिया है। कि बिगत 16 सालों में जिस प्रकार से पहाड़ों से पलायन बढ़ा है गाँव के गाँव खाली हो गए है। एक गाँव खाली होने से मतलब उसकी पूरी संस्कृति का खत्म हो जाना। आप शहरों में जितनी मर्जी कोशिश कर लो अपनी संस्कृति को बचाने की संस्कृति को उस रूप में नहीं संजोकर रख सकते जिस प्रकार से गाँवों में होती है। इस पहले भी पांडव वास के कई बेहतरीन गीत बाजार में आये है । रचना गीत ने भी उत्तराखंडी संस्कृति को विश्व पटल पर ले जाने में अहम् भूमिका निभाई थी इस गीत को हिंदी और पहाड़ी फोक को मिलकर बनाया गया था। अपांडव वास टीम ऐसे कई गीतों को लोगो तक लेकर आयेंगे।

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

गढ़वाली फिल्म - भाग जोग कहानी पटकथा और संबाद - महाबीर सिंह रावत कैमरा मैन - लक्की सैनी रूप सजा - रत्ना सेजवाल संपादन - राकेश कुमार (संजीवनी स्टूडियो ) गीतकार - महाबीर रावत, गिरधारी रावत स्वर - मुकेश कटैत, पदमेंद्र रावत, कल्पना चौहान व मीना राणा संगीतकर - राजेंद्र चौहान कला निर्देशक - रविन्द्र गुड़ियाल निर्देशक - रमेश गरियाल निर्माता - कुलदीप सजवाण सुभाष सजवाण



(भाग-जोग ) पार्ट दो को  लिंक ओपन करके देखिये,

इस लिंक पर देखिये। जगा रे उत्तराखंडवास्यूं जगा रे जाग्रति गीत क्या हलात हो गयी है रमणीय प्रदेश की जरुर सुने।

गढ़वाली भाषा की सोशियल मिडिया पर वारयल कविता जो आपने भी जरुर शेयर की होगी।

इस लिंक पर देखिये । एक ऐसा गीत जिस सुनकर आपको अपने खोये हुए लोग की याद आ जाएगी।

इस लिंक पर देखिये गढ़वाली युवाओं द्वारा बनाया गया एक जबरदस्त बैंड

गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली

 गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली        गढ़वाली भाषा का प्रारम्भ कब से हुआ इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं। गढ़वाली का बोलचाल या मौखिक रूप तब स...