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शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

राहुल सती का कर्णप्रिय आवाज में उत्तरैणी के भव्य आयोजन में लॉन्च हुआ पहला कुमाउनी चकबंदी गीत।

राहुल सती का कर्णप्रिय आवाज में उत्तरैणी के भव्य आयोजन में लॉन्च हुआ पहला कुमाउनी चकबंदी गीत। इस गीत को लिखा है पृथ्वी सिंह रावत जी ने 
जहाँ दिल्ली एनसीआर में उत्तरैणी महोत्सव की धूम मची थी हर संस्था अपने आयोजन को बड़ा बनाने के लिए जी जान से जुटी थी। वहीँ कुछ संस्थाओं ने अपने आयोजन में सामाजिक सरोकारों के मुद्दों को भी प्राथमिकता दी। उत्तराखंड एकता मंच तिमारपुर ने अपने आयोजन में चकबंदी गीत को लॉन्च करने के साथ साथ उस गीत पर एक गीत नाटिका के माध्यम से प्रस्तुति भी दी। कि किस प्रकार से चकबंदी पहाड़ में पलायन रोकने के लिए गेम चेंजर की भूमिका निभा सकती है। इस नाटिका का मंचन किया यंग उत्तराखंड कलब की टीम ने गौरतलब है की राहुल सती एक अच्छा गायक ही नहीं बल्कि वह सामाजिक आन्दोलन में भी बड़े जोश के साथ भाग लेता है। उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली के 20 नवम्बर 2016 के आयोजन में भी राहुल ने अपनी बड़ी भूमिका निभाई थी। तब भी उन्होंने समाज को एक जुट एक मुठ करने के लिए अपने गीत के माध्यम से लोगो को जागरूक किया था। 
निचे दिए गये लिंक पर आप इस गीत को सुन सकते है।
 

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

रिलीज हुआ पांडवास का नया गीत "शकुना दे"


रचना, टाइम मशीन, फुलारी, के वाद रिलीज हुआ पण्डवास का नया उत्तराखंडी गीत "शकुना दे" गौरतल है कि "शकुना दे" से पहले पण्डवास को हर गीत को लोगों ने तारीफ की थी और लोगों को पण्डवास से हद से ज्यादा  उमीदे है  कि  वह एक और सुन्दर गीत लेकर आएंगे जो उत्तराखंड के संगीत उद्योग में मील का पत्थर सावित  होगा, इस आर पण्डवास कुमाउनी गीत को लेकर दर्शकों के आये है, 

सोमवार, 13 नवंबर 2017

आखिर क्यों नहीं मिल पाते कभी भी अच्छे गीतों को व्यूअर

दर्शन फर्स्वाण सुन्दर आवाज का धनी है, वैसे तो दर्शन फर्स्वाण  गीत रिलीज हो चुके है, और इसमें कोई शक नहीं है की उनके हर गीत अच्छे है, पर अगर दादू गोरिया गीत की बात करें तो यह बहुत ही सुंदर लोक गीत है और दर्शन इस गीत को बहुत सुंदर गया है, संगीत के जानकार इनकी तारीफ करहै पर इतने सुंदर गीत को व्यूअर नहीं मिल पा रहे है, क्या इसका कारण गायक का नया होना है या फिर गीत की अच्छे से पब्लिसिटी नहीं होना है, आप भी सुनिए दर्शन फर्स्वाण की आवाज में ये खूबसुरत गीत 

मंगलवार, 7 नवंबर 2017

क्या आपने देखे जाकिर हुसैन और पहाड़ ढोल दमाऊ की जुगलबंदी -गौं गुठ्यार

जी हाँ अगर यकिन नहीं हो रहा है तो उत्तराखंड के प्रशिद्ध हस्य कलाकार किशना बगोट जी द्वारा चलायी जा रही गौं गुठ्यार की इस सीरीज में उन्होंने पहाड़ के ढोल दमाऊ के साथ, प्रसिद्ध तबला बादक जाकिर हुसैन की जुगलबंदी को बड़े ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है और यह सन्देश लोगों तक पहुंचाया है कि अगर कोई हमारे पहाड़ के ढोलसागर को लिपिबद कर दे तो आने वाली पीढ़ियां इस सिख सकती है, और केवल ढोलबादक के बच्चे ही क्यों इसको सीखे क्यों न अन्य समाज के बच्चे भी इस आत्मसात करें ,

बुधवार, 1 नवंबर 2017

गढ़वाली कुमाउनी भाषा को एक ही गाने में प्रयोग करके इतना सुन्दर गीत बनाया है गुंजन डंगवाल ने

गुंजन डंगवाल उत्तराखंड संगीत में एक स्थापित नाम है जिन्होंने पहाड़ी संगीत में बहुत से प्रयोग किये और वह उन सब में सफल रहे , इस बार वह एक नया प्रयोग करके दर्शक के बीच आये है , उन्होंने उत्तराखंड की दो प्रमुख भाषाओं के शब्दों को बारी बरी करके एक ही गाने में प्रयोग किया है और वाकई में यह गीत बहुत सुंदर बना है, "मै तै पता ना" के इस गीत में आवाज गुंजन डंगवाल और मोहित तिवारी की है और गढ़वाली लिरिक्स कैलाश डंगवाल ने लिखे है तथा कुमाउनी लिरिक्स आशा तिवारी और राजेंद्र कांडपाल ने लिखा है, संगीत में उनका साथ दिया है सुमंत पंवार प्रत्युष मनराल ने. इस प्रकार के प्रयोग से वह दोनों भाषाओँ के दर्शको को अपने गाने सुनने का मौक़ा दे रहे है और उनके दर्शक बढ़ रहे है, गौरतलब है कि गुंजन डंगवाल के संगीत ने चैते की चैतळी को नए अंदाज में अमित सागर की आवाज में दर्शकों के सामने रखा था और यह उत्तराखंड के संगीत में मील का पत्थर साबित हुआ,
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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

दर्जी दीदा का ये रैप सॉंग क्यों पसंद आ रहा लोगों को

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गढ़वाली गीत दर्जी दीदा ने जहां पुराणी पीढ़ी के पांव को ताल मिलाने पर विवश किया था, वही आज के दौर में में जब रेखा धस्माना जी ने इस गीत को फिर नए संगीत के साथ गया तो यह गीत  एक बार फिर हिट साबित हुआ, लोगों को पुराणी यादें ताजा हो गयी, वही इस सांग का जब रैप वर्जन बिपेंद्र और उपेंद्र बर्थवाल ने गया तो नयी पीढ़ी जो गढ़वाली गीतों को एक नए अंदाज में सुनना पसंद करता है, उनहे यह गीत बहुत पसंद आ रहा है, यह बात इस गीत पर आयी प्रतिक्रया से पता चलता है

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

क्या वाकई में फिर एक अंदोलन और होगा उत्तराखंड के पहाड़ों में

क्या वाकई में फिर एक अंदोलन और होगा उत्तराखंड के पहाड़ों में, इस बार का अंदोलन पहाड़ के जल जंगल जमीं और वहां की जवानी को बचाने के लिए होगा, कवि ओम प्रकाश सेमवाल जी की कलम से निकला गीत बहुत कुछ कहता है इस सुलगते अंदोलन के बारे में, इस गीत के माध्यम से उन्होने पहाड़ की पीड़ा को बेखूबी कहा है, ओम बधानी और मीना राणा जी की सुन्दर आवाज के साथ पहाड़ के जनमानस तक इस गीत को पहुँचाया है,
जरूर सुनिए इस गीत को

 

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

गढ़वाली फिल्मो के बाद दिनेश रावत की उत्तराखंडी चित्रहार में धूम

 
गौरतलब है कि दिनेश रावत उत्तराखंड फिल्म उधोग का एक स्तापित कलाकार है , दिनेश ने गढ़वाल की कई सुपरहिट फिल्मो में अभिनय किया है, अभी हाल में ही उनके गढ़वालीमें दो गाने बैक टू बैक आये है, जिन्हे उहोने खुद गया है , ये दोनों गीत उत्तराखंड की शानदार लोकेसन में फिल्माए गए है जहाँ "खुद त्येरि लगी रे " गीत में  अदिति उनियाल ने और "हरची रे " गीत में पूजा काला ने उनके साथ अभिनय किया है, संगीत मोती शाह जी ने दिया है गीत पदमेंद्र रावत जी ने लिखे है सहगायिका में नम्रता रावत ने अपने कंठो से सजाया है  राज आर्यन  ने म्यूजिक को ऑन  किया है , राज आर्यन ने अपने  सभी गीतों को हर्षिल में फिल्माया है , आज की तारीख में राज आर्यन अच्छे निर्देशक के रूप में उबर रहे है ,
 




मंगलवार, 22 अगस्त 2017

गिर्दा का लिखा गीत सुनिए नेगी जी की आवाज में "जैता एक दिन त आलू दिन ई दुनि में


सुनिए नरेंद्र सिंह नेगी जी की आवज में गिर्दा का लिखा गीत "जैता एक दिन त आलू दिन ई दुनि में

ततुक नी लगा उदैख, घुणन मुनई न टेक
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
ततुक नी लगा उदैख, घुणन मुनई न टेक
जैता कभि न कभि त आलो, ऊ दिन यो दुनी में....

जै दिन काटुलि रात ब्यालि, पौ फाटला दो कङालो-२
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि त आलो, ऊ दिन यो दुनी में....

जै दिन नान ठुलो नि रौलो, जै दिन त्यरो-म्यरो नि होलो-२
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि त आलो, ऊ दिन यो दुनी में....

जै दिन चोर नी फलाला, कै को जोर नी चलोलो-२
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता कभि न कभि त आलो, ऊ दिन यो दुनी में....

चाहे हम नि ल्यै सकूं, चाहे तुम नि ल्यै सको-२
जैता क्वै-ना-क्वै त ल्यालो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में
जैता क्वै ना क्वै त ल्यालो ऊ दिन यो दुनी में

बुधवार, 16 अगस्त 2017

नेगी जी के इस गाने को सुनकर प्रत्येक फौजी की आँखों में आंसू आ जायेंगे !

नेगी जी का एक ऐसा भाव रस का एक ऐसा गाना जिसकी प्रत्येक लाइन को सुनकर आँखों में आंसू आ जाते है, भले ही पुराणी पीढ़ी ने इस गाने को अपने दौर में बहुत सुना होगा आज की पीढ़ी को गाना सुनना जरुरी है, यह एक ऐसा गाना है जो आपके मन में देश भक्ति का भाव जगाता है, यहाँ गाना सदा बहार गाना है इसका महत्व अब और ज्यादा बढ़ गया जब एक तरफ से पाकिस्तान और एक तरफ से चीन भारत की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा हो, 
पर बिडम्बना देखो जहां आजकाल एक निम्न दर्जे के गाने को लाखों व्यूवर मिल जाते है वही इस गाने को इतने काम व्यूवर मिले है की कई बार बुरा लगता है की हमारा समाज अच्छे गानो के प्रति इतना बेरूख क्यों है, कारगिल दिवस के दिन जब मै यूट्यूब पर देश भक्ति पर गाये उत्तराखण्डी गीत सर्च कर रहा था तभी मुझे नेगी जी का यह गाना मिला मै रोने लगा , कितने भावपुर्ण शब्दों को रचा है नेगी जी ने, आप भी सुनिए इस गीत को और शेयर जरूर कीजिये यहाँ गाना नयी पीढ़ी तक पहुंचना जरुरी है,

कारगिल लैडे मा छौ माजी
पलटनों आदेश च
तू एखुली नि छै माजी
त्वे दगड़ा सैरु देश च

मंगलवार, 8 अगस्त 2017

1500 ढोल की थाप पर गुंजा हरिद्वार ,


संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 1500 से ज्यादा उत्तराखंड के ढोल बादकों ने हिस्सा अपनी इस कला को नया आयाम प्रदान किया , अब उन लोगों को रहा की उनके बच्चे जो आज के दौर में ढोल बजाने से दूर भाग रहे थे उन्हें इसमें उचित सम्मान नहीं मिल रहा था, विडिओ को इस लिंक पर देखिये






यह कला धीरे धीरे पहाड़ से लुप्त होने की कगार पर पहंच रही थी, अब उन्हें मिले इस मान सम्मान से उनकी आने वाली पीढ़ियां इस कला को सीखेगी और इस रूप में अपनाएगी, ढोल पहाड़ की पहचान है,

शनिवार, 29 जुलाई 2017

"आस" बखरी और एक बच्चे की कहानी है कुमाउनी फिल्म



"ज्योति फिल्म एंटरटेनमेंट" की द्वारा बनायीं गयी समाज में ब्याप्त बली प्रथा पर बच्चो के माध्यम से दर्शकों के मन में गहरी चोट करती है। फिल्म गोलू और सोनू के इर्द गिर्द घुमती है। गोलू नाम का बच्चा जो अपनी बखरी सोनू को बहुत प्यार करता है। पर गोलू के पिता सोनू को बलि के लिए किसी अन्य आदमी को बेच देते है। जब गोलू को पता चलता है कि उसकी बखरी को मन्दिर में बलि के लिए बेच दिया है। तो वह और उसका दोस्त मौका देखते ही बखरी को मंदिर से चोरी कर देते है। उसके बाद क्या-क्या घटना क्रम घटित होते है। क्या गोलू सोनू को बचा पायेगा। या बखरी की बलि दी जाएगी। इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

 फिल्म की कहानी दर्शक को बंधे रखती है। बच्चो ने अपनी मसूमियत से फिल्म में चार चाँद लगाये है। यह फिल्म आपके बच्चो को कुमाउनी भाषा सिखाने में भी मददगार साबित हो सकती है। इसलिय आप एक बार फिल्म जरुर देखें।
 

समाज के युवा वर्ग को सन्देश देता ढोल रसिया गीत # Dhol Rasiya Garhwali Song

 ढोल रसिया एक ऐसा गीत जो अपने आप में एक छोटी सी कहानी को समेटे हुए है गायक राजलक्ष्मी "गुड़िया" और विजय भारती के स्वरों में और Ashish Nava के संगीत से सजा यह शानदार लोकेसन में फिल्माया हुआ गीत एक समाज को एक सन्देश भी देता है,
जहां आज के दौर में नयी पीढ़ी के लड़के जाती के बंधनो को तोड़कर एक दूसरे से प्रेम करने

और जब उनके समाज उनकी जाती को यह प्रेम मंजूर नहीं होता है तो वह अपनी इज्जत के खातिर ऑनर किलिंग करने में भी नहीं हिचकते है वही ढोल रसिया गीत के नायक और नायिका जो अलग अलग जाती के किसी प्रकार से अपने समाज के लिए अपने प्रेम की बलि चढा देते है

गुरुवार, 13 जुलाई 2017

जुनूनी पहाड़ी युवा अनिल रावत


पहली बार मुझे एक ऐसे जुनूनी पहाड़ी युवा से मिलने सौभागय प्राप्त हुआ | जिसने सरकार की छोटी मदद से अपने साथ- साथ गांव के कई परिवार के लिए गांव में ही रोजगार जुटा दिया, जी यह है अनिल रावत जी, इनसे


 मै पौड़ी में चकबंदी जनजागरण कार्यक्रम में मिला था, अनिल एक सफल किसान की भूमिका निभा रहे, आज अनिल रावत साग सब्जी के अलावा मुर्गी पालन, मधुमखी पालन, मछली पालन, के आलावा जल्द कीवी की पेड़ भी अपने खेतों में लगाने वाले है, इस गाने में जो अहम् किरदार है वह खुद अनिल और उनकी टीम कर रही है,
 
इस लिंक पर देखिये नरेंद्र सिंह नेगी जी नया गीत जो जल्द आपके बीच आने वाला है


गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली

 गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली        गढ़वाली भाषा का प्रारम्भ कब से हुआ इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं। गढ़वाली का बोलचाल या मौखिक रूप तब स...