गुरुवार, 31 अगस्त 2017

हॉकी के जादूगार ध्यानचंद जी की ऐसी डॉक्यूमेंटरी जिसपर आप गर्व के साथ देश के सिस्टम पर गुस्सा करोगे।

हॉकी के जादूगार ध्यानचंद जी की ऐसी डॉक्यूमेंटरी जिसपर आप गर्व के साथ देश के सिस्टम पर गुस्सा करोगे।
ध्यानचंद हॉकी का ऐसा नाम जिसे हर कोई जनता है पर क्या आप उस दौर को देखना और जानना चाहते हो जिस दौर में ध्यानचंद हॉकी खेला करते थे। अगर आपने चक्रवर्ती सम्राट का नाम सुना होगा । जिस प्रकार चक्रवर्ती सम्राट का अश्व जिस भी राज्य में प्रवेश कर जाता था वह राज्य उस राजा का हो जाता था जिसका वह अश्व था। इसी प्रकार उस दौर में ध्यानचंद जी जादू पूरी दुनिया के लोगों पर सर चढ़कर बोलता था। भारत की हॉकी टीम जब एक बार हॉकी खेलने के लिए विदेसी दौरे पर निकलती थी तो आप यकीन नहीं करोगे उन्होंने जितने भी देशो के साथ खेला सब में विजय रहे । सबसे बड़ी बात ये है की भारत ने एक भी गोल नहीं खाया तथा हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने अकेले सौ गोल किये।
यह हकीकत जितनी गर्व करने वाली है उतनी ही गुस्सा करने वाली है। जब आप इस विडिओ को देखोगे तो आपको अपने आप पर गर्व भी होगा और आपको अपने सिस्टम पर गुस्सा भी आएगा कि आखिरी क्यों हमारी सरकारें इतनी असंबेदनशील होती है कि जिस ध्यानचंद ने भारत का सर पूरे विश्व में शान से ऊँचा किया उन्हें अपने जीवन के अंतिम दिनों में इतनी कठिनाई में मरने के लिए भगवान् भरोंसे छोड़ दिया। pls पूरा विडिओ जरुर देखना बड़ा अच्छा विडिओ है।

सिंहावलोकन कविता - मृगनयेनी

सिंहावलोकन कविता, काब्य की एक बिधा है। इस प्रकार की कविता में कविता जिस पहले शब्द से शूरु होती है, उसी शब्द से खत्म होती है, तथा कविता की पहली पंक्ति जिस शब्द से खत्म होती है अगली पंक्ति की शुरुआत उसी शब्द से होती है, और ये क्रम आगे की पंक्तियों में भी जारी रहता है।

मेरी इस प्रकार की एक कविता आप लोगों के सामने प्रस्तुत है।


मृगनयनी चित चोर छै तू चंचल स्वाणी,
स्वाणी सूरत मा त्येरि या मायाळी बाणी।

बाणी पर स्वरुं कू साज सरस्वती च लै,
लै पहनी कि जब तिन सोलह श्रृगांर कै।

कैै-कै दिन तक हर्ची रै म्येरि सेणी खाणी,
खाणी कमाणी मा बी गंट्याणू त्येरि गाणी।

गाणी इनि मिन देखी त्वेमा अन्वार फ्योली,
फ्योली सी उदमति तू घसेरुयूँ की छै न्योली।

न्योली सी झीस लग्येगे म्येरा क्वंसा प्राणमा,
प्राणमा बसग्ये जन भौरुं बसी फुल रस खाण।

खाण छै तू रूप रंगे की भली-भली मयेळी,
मयेळी माया जरा पैन्छी देदी हे!बांद दयेळी।

दयेळी छै तू रूपवती गुणवती हे! नृपनयेनी,
नृपनयेनी बणी रै तू सदा म्येरी हे! मृगनयेनी।।

प्रदीप रावत "खुदेड़"
31/08/2017

बुधवार, 30 अगस्त 2017

अ बटि अः तक गढ़वोळी सवरूँ कू वाक्य प्रयोग


अ-: अब स्यूं नेतो कू ढालू पहचैण मा आणू च
आ-: आम छौ पैली जीतणा बाद ख़ास व्हे जाणू च ।।

 इ-: इबरीदां चुनौ मा तैन फिर गौमा जाण।
 ई-: ईंट ढुंग धारि योजनो कु शुभारम्भ कै जाण।।

 उ-: उबारिदां जू वादा कैरी छा तैन फिर वी बोलण
 ऊ-: ऊँच नीच कु खेल तैन फिर इबरी बी खेलण।।

 ए-: एक मैना तक नोन्यलु तै खूब दारु तैन पिलाण।
 ऐ -: ऐन्च मंच पर चौड़ी विकास की नौटंकी चलाण।।

 ओ-:ओर पोर तैका चेला चमचा की हमेसा मौज राण।
 औ-: और जितणा बाद तैंन कबि मुख्जात्रा नि दिखाण।।

अं- अंध भक्ति मा नि डुबा तै की मान जावा म्येरि बात।
अः- अःण सुण कन तैन तुम्हारी मांग जीतणा का बाद।।

प्रदीप रावत "खुदेड"
29/08/2017

मंगलवार, 29 अगस्त 2017

सुशील बहुगुणा की एक और शानदार रिपोर्ट NDTV के सौजन्य से - प्राइम टाइम : चीन की सीमा से लगे आख़िरी गांव का हाल

चीन की सीमा से लगा भारत का ये आखिरी गांव है. लेकिन ये हमारे देखने का नज़रिया भर है. दूसरी तरफ़ से देखें तो ये भारत का पहला गांव भी है. लेकिन शायद हमने अपने गांवों को इस तरह देखना बंद कर दिया है. पहला होने की हैसियत, गांवों को अब कहां हासिल रह गई है. हम अब बड़ी-बड़ी योजनाओं, बड़े-बड़े सपनों की बात करते हैं. छोटी-छोटी सच्चाइयां इस विराट कहानी में जैसे ओझल हो जाती हैं. By NDTV 




सोमवार, 28 अगस्त 2017

गढ़वाली बाल कविता प्यारी बाछी(मि गोड़ी प्यारी प्यारी बाछी छौ)


मि गोड़ी प्यारी प्यारी बाछी छौ
मि कुछ नि बोलदो मि अभी लाटी छौ

कबी ये चैक कबी वे चैक मि भगदू छौ
छोटा नौनो दगड़ी मि खेलदू छौ

काळी सफेद लाल होंदू म्येरू रंग
खुश व्हे जंदो मि बच्चों का संग

मि गोड़ी प्यारी प्यारी बाछी छौ
मि कुछ नि बोलदो मि अभी लाटी छौ

प्रदीप सिंह रावत "खुदेड़ "
29 08 /2017 
 

रविवार, 27 अगस्त 2017

बाल कविता -घिंडुड़ी "मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू"



मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू

मे देखी की गुडिया राणी खुश व्हे जांदी
गोळया लगे लगे की वा म्येरा पैथर आंदी

मि वींका बाँटौ दूध पेकी फूर उड़ी जांदू
कबी कबी वेंकी दगड़ी मि छवी बी लगांदू

मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू

प्रदीप रावत "खुदेड़"
28 /08 /2017 
 

शनिवार, 26 अगस्त 2017

घुघती राणी Spotted dove -बाल कविता नंबर एक


या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुट्यार मा एैकी चारू खाणी च।

घुर-घुर कैकी तै वा दगड्यों तै बुलाणी च,
अपड़ा चोंचन वा सगोड़ा मा चारू खोज्याणी च
चोंच मा दबै की वा बच्चो कू चारू लिजाणी च।

आज घुघती हुयी कुछ उदास च,
किलै की गुडिया गयी अपड़ी नान्या पास च।

या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुटयार मा एैकी चारू खाणी च
या म्येरा पाडे़ घुघती राणी च,
टूप-टूप गुटयार मा एैकी चारू खाणी च।

प्रदीप रावत  "खुदेड़ "

गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली

 गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली        गढ़वाली भाषा का प्रारम्भ कब से हुआ इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं। गढ़वाली का बोलचाल या मौखिक रूप तब स...