शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

गर प्रकृति को निहारना है तो, The goal is to behold nature,


फोटो  मयंक डोभाल 

गर प्रकृति को  निहारना है तो,
चले आना मेरे पहाड़ |
गर प्रकृति को बिचरना है तो,
चले आना मेरे पहाड़ |

कुछ कायेद, कुछ कानून के साथ,
मौन होकर
चले आना मेरे पहाड़,

बिना नशा किये हुए,
क्योंकि यहाँ आने के बाद,
खूबसूरत नज़रों का नशा तुम पर छा जाएगा |

गर प्रकृति के साथ जीना है तो,
चले आना मेरे पहाड़ |
गर शुद्ध जल पीना है तो
चले आना मेरे पहाड़ |

शहर की तपिश को छोड़कर,
सारे काम क्रोध से मुहं मोड़कर |
चले आना मेरे पहाड़ |
गर प्रकृति को  निहारना है तो,

गुरुवार, 25 अगस्त 2016

Garhwali Song Bhooli Bisri Singer – Prem Singh Gusain

Garhwali Song Bhooli Bisri Singer – Prem Singh Gusain Music – Sanjay Kumola Lyrics – Atul Gusain ”jakhi” Recording – Sagar Sharma Editor – Garhwali Brothers MUSIC ON GARHWALI BROTHERS ENTERTAINMENT PVT.LTD

मंगलवार, 16 अगस्त 2016

अब की राखी में मेरे भैया!














अब की राखी में मेरे भैया!
उत्तराखंड को अपनी बहन बना लेना,
अपनी बहना को बस एक ही तोहफा देना।

आजा घर लौटकर मुझे उजाड़ने से बचा ले,
मानव विहीन हो रही हूँ मैं!
मेरे आँगन में फिर किलकारियाँ गुंजाले।
बंजर हो गये है खेत खालियान मेंरे,
इन्हे फिर फसलों से सजा ले।
अब की राखी में मेरे भैया!
उत्तराखंड को अपनी बहन बना लेना,
अपनी बहना को बस एक ही तोहफा देना।
इस लिंक पर देखिये नरेंद्र सिंह नेगी जी
नया गीत जो जल्द आपके बीच आने वाला है
आजा भैया मेरे इन खेतों में हल चला ले,
आकर फिर गाँव में फिर चैपाल सजा ले।
खाली हो गयी है गाँव की स्कूल,
आकर अपने बच्चों को इसमें पढ़ा ले,
टूट चुके है घर तेरे आकर इन्हे बना ले।
अब की राखी में मेरे भैया!
उत्तराखंड को अपनी बहन बना लेना,
अपनी बहना को बस एक ही तोहफा देना।
इस लिंक पर देखिये फ्युलोडिया ओर्जिनल गीत
बहुत दिनों से पूजा नही की है तुमने,
आकर इष्ट देव की पूजा थाल सजा लेना।
नेताओं ने लुट डाला है मुझे !
इन्हे सत्ता से हटा लेना,
सो रहे है जो लोग उन्हे आकर जगा देना,
अब की राखी में मेरे भैया!
उत्तराखंड को अपनी बहन बना लेना।
अपनी बहना को बस एक ही तोहफा देना

तेरी बहना अस्पताल में स्वीली पीड़ा से मर रही है,
इस अस्पताल में डाक्टर बुला लेना।
गलत राह में निकल पड़े है जो बच्चे मेंरे,
आकर उनके बचपन को लौटा देना।
कहीं दूर न निकल जायें वह,
आकर उन्हें सही राह पर लौटा देना।
अब की राखी में मेरे भैया!
उत्तराखंड को अपनी बहन बना लेना।
अपनी बहना को बस एक ही तोहफा देना
इस लिंक पर देखिये गढ़वाली कविता कब
 तकै लुट्दा तुम ये पाड़ तै
यही मेरी राखी का सच्चा उपहार होगा,
यही भैया का अपनी बहन के लिए सच्चा प्यार होगा ।।

गुरुवार, 11 अगस्त 2016

Narendra Singh Negi Garhwali Singar
























तान सेन सी आपै आवाज,
बैजू बाअरा सी आपमा साज।
बिराजमान आपका कंठ मा साक्षत सुरों की देवी,
आप छा गढ़ रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी।

कलम आपमा बांसे च, माटे च स्याई,
लेख्दी च जबवा, बण जांदी सोने लिखाई।
जब भी आपन भ्रस्टाचार पर कलम चलयी,
तब तब आपन सरकारू की जड़ हिलायी।

न आप देव छा, न देवता, न छा भगवान,
बस हम जन छन आप भी इन्सान।
अपड़ी कलम ते आपन कभी बँधी नीच,
कलम कभी कैका अधीन रखी नीच।

मनमा आपका मात्रभूमि दुर्दशे पीड़ा च,
अपड़ा ही लुटणा छन, मनमा ही गिला च।
पहाड़ मा स्थान आपो जन ऊँचू आगाश,
लेखनी आपै जन हैंरू भैरू बस्ग्याल चौमास।

आप केवल गीत गायक निछा,
अपितु पहाड़ै संस्कृति छा।
आप केवल पिता, पुत्र, न,
अपितु पूरी प्रकृति छा।

आप दाना मनख्यूं ते सांस छा,
आप दीदी भुल्यू की आस छा।
आप जवनू कू हौंसला छा,
नौन्यवू ते संस्कारू कू घोसला छा।

आप सिपै कू ते वीर रस छा, 
संसार मा गढ़वालो कू यश छा।
आप हैंसण छा, आप ख़ुशी छा,
पहाड़ दुःखी त आप दुखी छा।

आप केवल कवि न, कवेन्द्र छा,
आप केवल शब्द न, शब्देइंद्र छा।
धन्यभाग हमरा!
जू हमन देवभूमि मा जन्म ल्याई,
आप जन सरस्वती पुत्र यी धरती मा पायी।
आपै प्रेरणान मेरा हाथू मा कलम पकड़ाई,
मे जन अनाड़ी ते द्वी आखर लिखण सिखाई।


प्रदीप रावत (खुदेड़)

शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

मेरा स्वळा रूप रंग का छापा छपे ग्येन सैरा पाड़ मा, उर्वर्शी रौतेला Garhwali poem

फोटो- उर्वर्शी रौतेला
मेरा स्वळा  रूप रंग का  छापा छपे ग्येन सैरा पाड़ मा,
सभी अलज्या छन म्यारा स्वळा  रूप रंगा  जंजाळ मा।

ककड़ी सी कुंगली गात  मेरि ,गंजेळी मुठठी जन कमर च,
गैरी मायादार आॅँख्यी छन मेरि, अभि त बाळी उमर च।
हाथ्यू मा चुड़ी बजदिन मेरि खन-खन,
खुटयू मा झवरी बजदीन मेरि छम-छम।
मेरा स्वळा  रूप रंग का  छापा छपे ग्येन सैरा पाड़ मा,
सभी अलज्या छन म्यारा स्वळा  रूप रंगा  जंजाळ मा।

मेरि ज्वनि मा आयू बसग्याली मौयार च,
चैतरफ फैलाई मेरि अपड़ी माया बयार च।
नरंगी सी रसीली जुबान मेरि यूं ओंटयूडयू मा,
चाॅदी की मुरखी झलकणी मेरि यू कनदूड़यू मा।

क्वी थेकळी  लगाणू च अगाश मा, क्वी उपाड़ी लाणू च,
मे पाणा का खातिर हर क्वी  तिमलामा फूल खिलाणू च।
मेरि माया की घूंघराळी लटल्यू मा व्हेगेन सब घैल,
हर क्वी बणणू च अब अपडा मनमा  सुप्न्यों का महैल।

हर अखर मा बस  सभ्यूं तै अब मेरू नौ दिखेणूचा,
विन्या मेरि  झळक दिख्या न खयेणू न सियेणू च।
मेरि माया का फूल खेलाणा छन सबि ज्युकुडिया उपवन मा,
मेरि तसवीर बसाई च सभ्यू की अपड़ा कुंग ळा  मन मा।

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मंगलवार, 2 अगस्त 2016

मै नारी हूँ ! I am Woman! Garhwali poem

मै नारी हूँ !


                          मैं केवल मूरत नही, मै नारी हूँ !
                          मैं भोली सूरत नही, मैं चिंगारी हूँ !
                          मुझे घर की चार दिवारों में मत बाँधों
                          कोमल भले हूँ पर मेरी शक्ति को कम मत आँकों।
                          मैं केवल मूरत नही, मै नारी हूँ !
                          मैं भोली सूरत नही, मैं चिंगारी हूँ !

                          बुलंद करने दो मुझे भी अपनी आवाज को,
                          बीर रस के स्वर में बजाने दो मुझे अपने साज को।
                          मैं गौरा हूँ, मैं तीलू हूँ, मैं ही टिंचरी माई हूँ,
                          अपनी लोहे की जंजीरों को काटने मैं आयी हूँ।

                          इतिहास सक्ष्य हैं !
                          मैने अंदोलनों में शिरकत की है जब-जब,
                          विजय सुनिश्चित हुई इस धरा पर तब-तब
                          आज हमारे भय से हिमालय शिखर पिघल पड़े है,
                          आज हम फिर अपने घरों से निकल पड़े है।

                          ये समस्त पहाड़ मुझसे है !
                          ये समस्त बहार मुझे से है !
                          मैं ही पहाड़ की दुशवारियों को पार करूँगी,
                          मै ही पहाड़ की कठिनाओं को तार-तार करूँगी।
                          मैं केवल मूरत नही मै नारी हूँ !
                          मैं भोली सूरत नही ? मैं चिंगारी हूँ !

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गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली

 गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली        गढ़वाली भाषा का प्रारम्भ कब से हुआ इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं। गढ़वाली का बोलचाल या मौखिक रूप तब स...