सोमवार, 30 नवंबर 2020

फ्योंली गढ़वाळी कहाँनी

 आज जब फ्योंली दर्जा चार पास कना बाद, पांचवीं कक्षा मा बैठी त भौत खुश छै, आज भले विंकी किताब कॉफी पुरैणि छै पर वीं पढ़ण वोळी मस्टेनि नयी छे, हालांकि रोज वा सबसे एथरे लैन मा बैठदि छैं पर आज वा अबेर मा ऐ छे त इले सबसे पैथर बैठि छै, 

मस्टेनि जी सब बच्चों तैं आज रावण पर एक निबन्ध लेखणु तैं दे, फ्योंलिन कुछ इन निबन्ध लिखी कि मस्टेनि जी न वे निबन्धो तैं गलत बोली सकिनन अर न वे निबन्ध तैं सही मान सकिन, फ्योंलिन निबन्ध कुछ ये तरो से लेख्यू छौ, कि रावणन राक्षस कुल मा जन्म ले छौ, अर वु शराब बि भौत पेन्दू छौ, शराब त म्येरु बुबा रामचरण बि पेन्दू, शराब पेकि म्यारू बुबा म्येरि माँ तैं भौत मरदु, ब्याली रात बि म्यार बुबान  म्येरि माँ तैं बिजा मारी,  जैकि बजह से म्येरि माँ आज जल्दी उठी नि साकी इले हि मि इस्कूल अबेर मा पौंच्यो, पर रावणन कबि बि अपड़ी ब्वारी तैं मारी नि च, वू त भौत प्यार करदु छौं अपड़ी ब्वारी तैं, इख तके कि वेकि ब्वारी गैहणो लकदक बणी रैन्दी छे, रावणा अपड़ी ब्वारी पर इतगा गैहणा पैराया रैन्दा छा कि क्या ब्वन,  पारसी मिन जब टीबी पर रामायण देखी त तब म्ये पता चली, पर म्येरा बुबान त म्येरि माँ का सब गैहणा बेचिन, एक अंगूठी ज्व म्येरि माँ कि म्येरा जवैं कु तैं रखि छे बागदान मा पैराणु तैं वा बि बेच दे,  पिछला मैना माँ जब नन्या गौं गै छे त बाबान बक्सो तालु तोड़ी अर वीं अंगोटी तै मुल्य खोळ दुकादर बव्डा मा बेच ग्य, अब पता नि म्येरु बागदान जन्मा ह्वलु ता, 

जब मस्टेनि यू निबन्ध पौढ़ी त मस्टेनि जी समझि नि सकिन कि फ्योंली तैं दस मदि दस नंबर दयों या दस मदि जीरो, आप बतावा कतगा नम्बर मिलण चैंदा फ्योंली तैं, 


टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून के युवाओं के लिए भारतीय सेना ने 20 दिसंबर से सेना भर्ती की होने के लिए विशेष अभियान छेड़ा हैं यह भर्ती 2 जनवरी 2021 तक चलेगी। रजिस्ट्रेशन नवंबर से शुरू हो चुके हैं और अब रजिस्ट्रेशन बंद होने में कुछ ही दिन शेष हैं। जो भी अभ्यर्थी इसमे भाग लेने के लिए इच्छुक हैं वे 4 दिसंबर से पहले पहले http://joinindianarmy.nic.in पर अपना रजिस्ट्रेशन करें , बिना रजिस्ट्रेशन के भर्ती अभियान में भाग नहीं ले सकते हैं, 


रजिस्ट्रेशन कराने से पहले नीचे सभी पदों के लिए तय की गईं योग्यताओं का विवरण 1) सिपाही के पद की आयु सीमा साढे 17 वर्ष से 21 वर्ष तय की गई है। उम्मीदवारों के दसवीं में कम से कम 45 फीसदी मार्क्स और हर एक विषय के अंदर 33 फीसदी मार्क्स होना अनिवार्य है। 2) सिपाही टेक्निकल के लिए आयु सीमा साढ़े 17 वर्ष से 23 वर्ष तय की गई है और उसके लिए 12वीं में साइंस साइड से 50 फीसदी मार्क्स होना अनिवार्य 

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

कहानी - डॉक्टर की लेखनी || लेखिका - आरोही रावत, कक्षा - 3, उम्र 8 साल,


शशि नाम का एक लडका था। शशि चौकलेट और टॉफी बहुत खाता था!! अपनी मम्मी पापा से हर बार चॉकलेट और टॉफी खाने की जिद्द करता था !! मम्मी पापा भी उसकी जिद्द के आगे हार जाते थे और उसे चॉकलेट दे देते थे !! 
एक बार वह अपनी मम्मी के साथ बाजार गया और उसने वहाँ अपनी मम्मी से टॉफी मांगी । मम्मी ने शशि को टॉफी दे दी !! थोड़ी देर बाद अचानक उसके दांत में दर्द होने लगा उसने दर्द की बात मम्मी को बताई !! शशि की मम्मी उसे पास ही डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर को उसके मुहं में दर्द की बात बताई । डॉ ने शशि से कुछ सवाल पूछे !! तुम्हारा नाम क्या है ? बच्चे ने कहा शशि !! डॉ ने उम्र बताने को कहा ? शशि ने कहा 9 साल !! डॉक्टर ने कहा कौन सी क्लास में पढ़ते हो ? शशि ने जवाब दिया कक्षा चार में !! डॉ ने शशि को मुहं खोलने के लिए कहा और मुहं देखने के बाद पूछा क्या आप चॉकलेट खाते हो ? शशि चुप हो गया !! डॉ समझ गए और कहा क्या आपको पता है चॉकलेट खाने से आपके पूरे दांत ख़राब हो जायेंगे, और एक दिन तुम्हारे सारे दांतों पर कीड़े लग जायेंगे। और फिर उन्हें तोड़ना पडेगा।!! शशि खमोश होकर सुन रहा था । डॉ ने उससे कहा मुझसे वादा करो कि आज के बाद तुम चॉकलेट नही खाओगे!! शशि ने डॉ से वादा किया कि आज के बाद वह चॉकलेट नही खायेगा। 
डॉ ने उसके पर्चे पर दवाई लिखी और शशि की मम्मी से उन्हें सामने वाली दुकान से लेने को कहा और कहा कि पर्चे पर जैसा लिखा है उसके हिसाब से बच्चे को दवाई दे देना । शशि की मम्मी ने सामने वाली दुकान से दवाई ली और घर वापस आकर दवाईओं को घर पर बने रैंक जहाँ पहले से और दवाईयाँ रखी थी उनके साथ रख दिया।।


शाम को जब शशि की मम्मी ने शशि को दवाई खिलाने के लिए रैंक से दवाई निकालनी चाही पर शशि ने उन दवाईओं को अन्य दवाईयों के साथ मिला दिया था। मम्मी ने डॉ की पर्ची निकाली और उसे पढ़कर दवाई खोजने लगी । पर डॉ की राइटिंग समझ में नहीं आई उसने शशि के पापा को भी दिखाया शशि के पापा को भी डॉ की लेखनी समझ में नही आयी। काफी कोशिश करने के बाद भी जब समझ नही तो मम्मी ने कुछ मिलती-जुलती दवाई निकली शशि को पिला दी पर मम्मी ने शशि को गलत दवाई दे दी थी !! जिससे शशि की तवियत और ख़राब हो गयी उसे बुखार भी हो गया।। उसके मम्मी पापा डर गए और वह उसे जल्दी से उसी डॉ के पास ले गए । डॉ ने शशि को देखा और उसे एक सुई लगायी और मम्मी पापा से कहा घबराने कोई बात नही है शशि जल्द ही ठीक हो जायेगा !! अच्छा हुआ आप बच्चे को जल्दी ले आये वरना कुछ भी हो सकता था। शशि के शारीर में गलत चीज खाने से गलत प्रतिक्रया हुई है !! आप लोगो ने इसे कोई गलत दवाई तो नही दी !! मम्मी ने कहा शायद मैंने गलत दवाई दे दी !! डॉ ने कहा पर मैंने तो आपको लिखकर दिया था कि ये दवाई देनी है !! मम्मी ने कहा कि डॉ साहब हमे आपकी राइटिंग समझ में आई आपने लिखा ही ऐसा था कि उसे कोई पढ़ ही नही सकता। और हमने गलत दवा दी जिसकी वजह से आज हमारा बच्चा मौत के मुहं में पहुँच गया । डॉ को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उनसे माफ़ी मांगी । इधर शशि को होश आ गया उसकी मम्मी ने उसे चूमा डॉ ने कहा कि आज मेरी वजह से आपको तकलीफ उठानी पड़ी तभी शशि बोल उठा डॉ अंकल आप मुझसे भी प्रोमिश करो कि आज के बाद आप भी साफ साफ राइटिंग में लोगों को दवाई लिखकर दोगे डॉ को बहुत आत्मग्लानी हुई और उसने कहा हाँ बेटा मै आज से अभी से ये वादा करता हूँ कि साफ साफ दवाई लिखकर दूँगा!!



लेखिका
आरोही रावत
कक्षा - 3
उम्र 8 साल

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

SHREE DEV SUMAN || वह सुमन ही था !




वह सुमन ही था !
जो मुरझाकर भी अभी खिला हुआ हैं।
वह सुमन का ही बीज है !
जिससे हमें सत्य, संघर्ष, का सहास मिला हुआ है।

वह सुमन ही था !
जिसने लोकहित में अपनी जवानी खपा दी।
वह सुमन ही तो था !
जिसने जुल्मियों को जनमानस की ताकत बता दी ।

वह सुमन ही था !
जिसने इतिहास में एक नया अध्याय  लिखा था।
वह सुमन ही तो था !
जो लाख जुल्म पर भी बिल्कुल नही झुका था।

ऐसे सुमन को मै !
उनके चरणों में श्रदा सुमन चढ़कर प्रणाम करता हूँ ।
ऐसे श्रीदेव को मैं
महादेव मानकर झुककर नमन करता हूँ

प्रदीप रावत खुदेड़

बुधवार, 9 मई 2018

23.5 किलो की मूली पैदा करने वाले श्री विद्या दत्त का ये और कारनामा - सुधीर सुंदरियाल


बाधाएं कब बांध सकी हैं आगे बढ़ने वालों को..!
आपने कुछ समय पहले कई अख़बार और सोशल मीडिया पर एक खबर देखी होगी कि श्री विद्या दत्त नाम के एक बुजुर्ग ने एक 23.5 किलो की मूली पैदा की है। वो बुजुर्ग इस बार उससे भी बड़ी मूली पैदा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएंगे। कल हमैं इनकी कर्मभूमि मोती बाग ग्राम सांगुड़ा,  देखने का मौका मिला। ....जहां इन्होंने अपना कर्मक्षेत्र  चुना उस क्षेत्र मे कभी पानी की बहुत बड़ी समस्या थी। वहां पीने का पानी तक नहीं था। तब ऐसी परिस्थिति में श्री विद्या दत्त जी ने लगभग एक लाख लीटर का पानी का टैंक जमीन के अंदर बनाकर उसके ऊपर के पहाड़ के बरसाती पानी को इकठ्ठा कर उसमे डाल कर, रैन वाटर हार्वेस्टिंग का एक अनोखा उदाहरण दुनिया को दिखा दिया।

अमेज़ॉन से खरदिए मंडवे का आटा नीचे के लिंक से 
इस टैंक का नाम सुखदेई जलाशय है, जिसका निर्माण  1978 मे किया गया। जहां पीने का पानी नहीं मिलता था वहां श्री विद्या दत्त जी ने इस जलाशय से अपने खेतों में पानी की व्यवस्था कर सागसब्जी और फलों का रिकार्डतोड़ उत्पादन करने लगे । आज भी 82 वर्ष से ऊपर की उम्र मे वो साग सब्जी, फल और मौन पालन मे नित नये प्रयोग करते रहते हैं। कृषि पंडित श्री विद्या दत्त जी इन प्रयोगों के अलावा लगातार भू सुधार और #चकबन्दी के लिए भी काम कर रहे हैं। ऐसे जीवट महापुरुष को मेरा शत शत नमन है।

Sudhir Sundriyal
 भलु लगद /Feel Good
बंजर खेत आबाद करो एक मुहीम

सोमवार, 7 मई 2018

बिच्छू घास से बनी चाय


खबर नॉन स्टॉप से - 
पहाड़ की एक घास जो बदन पर लग जाए तो खुजली के मारे जान निकल जाती है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि यह घास चाय की मीठी चुस्की भी दे सकती है। ठंड में आपके बदन को गर्म रखने के लिए भी तैयार है। हालांकि बहुत ज्यादा प्रचलन न हो पाने की वजह से आज तक यह उत्पाद अपने ही घर में दम तोड़ रहे है, लेकिन अब जिला सहकारी बैंक सहकारी कौतिक-2016 के जरिये एक बाजार देने जा रहा है। जो 19 जून से गुरूड़ाबाज में शुरू होने जा रहा है। जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल करेंगे। अब वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ की बिच्छू घास सीमा पार भी अपनी धूम मचाएगी और पहाड़ के कास्तकार होंगे मालामाल। बिच्छू घास से बनी चाय को भारत सरकार के एनपीओपी (जैविक उत्पादन का राष्ट्रीय उत्पादन) ने प्रमाणित किया है। 
आप इस अमेजॉन इस लिंक से भी चाय और अन्य समान मंगवा सकते हो जैसे की नेट्ले लीफ है
इस ग्रीन टी को बिच्छू घास के अलावा पिरुल, बुरांश, तुलसी और चीड़ की पत्तियां से तैयार किया गया है। जो बागेश्वर स्थित हिमालयन ऑग्रेनिक औदोगिक उत्पादन सहकारी समिति में निर्मित है। खास बात यह है कि इस चाय के औषधीय लाभ भी है। बताते है कि बिच्छू घास में जोड़ों के रोग से लड़ने की असीमित क्षमता होती है। बिच्छू घास से कृषकों ने शॉल भी तैयार कर ली है। इसे भी मेले में शामिल किया जा रहा है। बताते है कि बिच्छू घास यानि नेटल ग्रास के रेशे से धागे तैयार किए है। जिससे यह शॉल तैयार की गई है। इसके अलावा मेले में मिट्टी की मूर्तियां मिलेंगी। जो खास उधमसिंहनगर जिले के कुम्हारों दारा तैयार की गई है। पत्थर की चककी, कपड़े और रुई से तैयार की गई है और एनपीओपी ने इन उत्पादों को राज्य के बाहर विदेशों तक बेचने का जिम्मा उठाया है। इस मेले के पहाड़ के कास्तकारों को बाजार दिलाया जाएगा। लोग मसाला डोसा के बारे में तो जानते है, लेकिन हमारा प्रयास है कि लोग भट्ट की चुड़कानी और झिगोरे की खीर के बारे में भी जाने। मसाला डोसा की तरह पहाड़ी व्यंजन, हस्त शिल्प को भी पहचान मिले। मेले में पहाड़ी व्यंजन के साथ पहाड़ी खेल-कूद को भी पहचान दिलाने की तैयारी है। मुख्य कार्यक्रम समन्वयक डॉ.अरविंद जोशी ने बताया कि मेले में गुल्ली डंडा, खो-खो, कबड्डी, मुर्गा झपट, बाघ बकरी सहित कई अन्य खेलों का आयोजन कराया जाएगा। जो मेले में आने वाला हर व्यक्ति खेल सकता है। मेले में कुल 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। एक स्टाल पहाड़ के युवाओं के लिए होगा। जिसके जरिये उनकी कैरिएर काउंसलिंग की जाएगी।
आप इस अमेजॉन इस लिंक से भी चाय और अन्य समान मंगवा सकते हो जैसे की नेट्ले लीफ है

गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली

 गढ़वाल के राजवंश की भाषा थी गढ़वाली        गढ़वाली भाषा का प्रारम्भ कब से हुआ इसके प्रमाण नहीं मिलते हैं। गढ़वाली का बोलचाल या मौखिक रूप तब स...