खतरे की घंटी है, वही पूरे विश्व में भोजपुरी एक ऐसी भाषा है जो बड़ी तेजी से बढ़ रही है, भारत के समुद्र तट पर जहाँ पहले एक सौ अस्सी भाषाएँ बोली जाती थी अब केवल दो या तीन ही भाषाएँ वजूद में है , एक भाषा का समाप्त होना मतलब एक संस्कृति का समाप्त होना,पलायन के कारण ज्यादातर भाषाएँ समाप्ति की कगार पर खड़ी है,

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें