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रविवार, 27 अगस्त 2017

बाल कविता -घिंडुड़ी "मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू"



मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू

मे देखी की गुडिया राणी खुश व्हे जांदी
गोळया लगे लगे की वा म्येरा पैथर आंदी

मि वींका बाँटौ दूध पेकी फूर उड़ी जांदू
कबी कबी वेंकी दगड़ी मि छवी बी लगांदू

मि फुर उड़ीत्येरि डिंडाळी मा आन्दू
मि सुर उड़ी त्येरि तिबरि मा आंदू

प्रदीप रावत "खुदेड़"
28 /08 /2017 
 

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