संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 1500 से ज्यादा उत्तराखंड के ढोल बादकों ने हिस्सा अपनी इस कला को नया आयाम प्रदान किया , अब उन लोगों को रहा की उनके बच्चे जो आज के दौर में ढोल बजाने से दूर भाग रहे थे उन्हें इसमें उचित सम्मान नहीं मिल रहा था, विडिओ को इस लिंक पर देखिये
यह कला धीरे धीरे पहाड़ से लुप्त होने की कगार पर पहंच रही थी, अब उन्हें मिले इस मान सम्मान से उनकी आने वाली पीढ़ियां इस कला को सीखेगी और इस रूप में अपनाएगी, ढोल पहाड़ की पहचान है,
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